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सारे जहां से प्याrरा मामा हमारा : अविनाश वाचस्पति
मामा जानते होंगे, देश के मुखिया जानते होंगे – पर किसी पर इस रहस्य का पर्दाफाश नहीं करना चाहते। जबकि उनकी कुटिल चालें मुखर हो सब जाहिर करती हैं। यह इस्तीशफा नहीं देते और लतीफा बन रहे हैं
यहाँ भी है छेड़छाड़ - व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट
रिपोर्टें’ मजबूत फाइल-पैड, क्लाथिंग वाले लिफाफों में सुरक्षित होकर नहीं चलेंगी, फटे-टूटे, भौंडे-भड़काऊ लिबास में अंग प्रदर्शन करती फिरेंगी तो फिर ‘छेड़छाड़’ तो होगी ही। ‘रिपोर्टों’ को मर्यादा के आवरण में ‘लाख-चपड़ी’ से पैक होकर चाहरदिवारियों में दुबके रहना चाहिए। वे अगर यू ही यहाँ-वहाँ छुट्टी घूमती रहेंगी तो ‘छेड़छाड़’ तो क्या उनके साथ ‘बलात्कार’ भी हो सकता है। समय बहुत खराब चल रहा है, रिपोर्टों के माई-बाप, अभिभावकों को भी बेहद सावधानी एवं एहतियात बरतना चाहिए। कब कौन कहाँ से आकर उनकी प्यारी-दुलारी ‘रिपोर्ट’ का छेड़ जाए कोई भरोसा नहीं
यही तेरी कहानी है यही मेरी कहानी है : श्याम सखा ‘श्याम’
श्याम सखा ‘श्याम’ की ग़ज़ल
घर से बाहर हूं घर मेरे भीतर है : श्याम सखा ‘श्याम’
श्याम सखा ‘श्याम’ की रचना
चर्चित व्यंग्यकार हरि जोशी ‘व्यंग्यश्री सम्मान’ से सम्मानित हुए
उनके कृतित्व एवं व्यक्तित्व की व्याख्या करते हुए कहा कि इनका नाम भी दो सर्वश्रेष्ठ व्यंग्यकारों के नाम से प्रभावित है। इनके नाम में हरिशंकर परसाई का ‘हरि’ और शरद जोशी का ‘जोशी’ सम्मिलित है। उनके मूलतः इंजीनियर होने पर चुटकी लेते हुए कहा कि इंजीनियर और व्यंग्यकार दोनों में समानता है। दोनों को ही ठोक-पीट करनी पड़ती है।
मीटिंग, मीटिंग मीटिंग और मीटिंग्स में बिज़ी ब्यूरोक्रैट्स : रीता विश्वकर्मा
हमारा मानना है कि वर्तमान में विशुद्ध रूप से नौकरशाही चल रही है जिसे ‘ब्यूरोक्रेसी’ कहते हैं। गाँव के सेक्रेटरी से लेकर कलेक्टर तक और होम गार्ड से लेकर पुलिस कप्तान तक सभी सरकारी ओहदेदारों का सर्वे किया जाए तो एक ही बात सामने आएगी कि सभीं साहेबान मीटिंग में बिजी हैं, जहाँ आम आदमी अपनी समस्या लेकर नहीं जा सकता है
बलात्कारियों की गुप्त मीटिंग : व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट
ये लोग हमें कमज़ोर समझ रहे हैं मिञों, तभी तो फाँसी दो फाँसी दो की रट लगाए बैठे हैं, जैसे हमारी कोई सुनेगा ही नहीं। फिर किस-किस को फाँसी दोगे बाबा? हम तो घर-घर में घात लगाए बैठे हैं, एक ढूँढ़ोगे तो हज़ारों की तादात में मिलेंगे, कर लो क्या करते हो
व्यंग्यकार हरि जोशी को मिलेगा 2013 का व्यंग्यश्री सम्मान :
लेखक, व्यंग्यकार हरि जोशी का जन्म 17 नवंबर 1943 को ग्राम खूदिया ( तहसील खिरकिया, जिला हरदा, म.प्र.) में हुआ। जोशी जी ने मेकेनिकल इंजीनियरिंग में एम.टेक. व पीएच.डी.करने के बाद अध्यापन कार्य किया और शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, उज्जैन(म.प्र.) से सेवा निवृति ली
व्यंग्यश्री सम्मान समारोह हिंदी भवन में: पं. गोपालप्रसाद व्यास के जन्मदिन पर 13 फरवरी को
इस सम्मान के अंतर्गत उन्हें 51 हजार रुपये की राशि, वाग्देवी की प्रतिमा, प्रशस्ति पत्र, रजत श्रीफल और शॉल भेंट किए जाएंगे
आंखे तो गीलीं थीं - श्याम सखा ‘श्याम’
श्याम सखा ‘श्याम’ की रचना
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